महिला एवं बाल विकास विभाग

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  • उप निदेशक महिला एवं बाल विकास--05642-223349

समेकित बाल विकास सेवाऐं

योजना का विवरण

ऑगनबाडी केन्द्रव संचालन के लिये प्रति केन्द्र एक ऑगनबाडी कार्यकर्ता एवं एक ऑगनबाडी सहायिका पद मानेदय आधार पर स्वीरकृत किया गया है। मिनी ऑगनबाडी केन््द्र के लिए केवल कार्यकर्ता का पद मानदेय आधार पर स्वीरकृत किया गया हैा ऑगनबाडी कार्यकर्ताओं/ सहयोगिनियॅा/सहायिकाओं का चयन ग्राम सभा के द्वारा किया जाता है। ग्राम सभा द्वारा अनुशंसित महिला के कार्यादेश बाल विकास परियोजना अधिकारी द्वारा जारी किये जाते हैा ऑगनबाडी कार्यकर्ता के न्यू्नतम शैक्षिणक योग्यअता 10 वी पास, मिनी ऑगनबाडी कार्यकर्ता एवं सहयोगिनी के लिये शैक्षिणक योग्य्ता आठवी पास निर्धारित है । ऑगनबाडी सहायिका के लिए शैक्षिणक योग्येता 5वीं पास निर्धारित है, परन्तुी पढी लिखी महिला उपलब्धल नहीं होने पर सहायिका के लिये अनपढ् महिला का भी चयन किया जाता है। इन पदों के लिये महिलाओं का स्था नीय निवासी तथा विवाहित होना आवश्य क है एवं आयु 21 वर्ष से 45 वर्ष के मध्यल होनी चाहिये । धौलपुर जिलें मे 1024 आंगनबाडी केन्द्र स्वीवकृत है, जिनमें 1012 केंद्र संचालित है जिनमे परियोजनावार सीडीपीओं , महिला पर्यवेक्षक, आंगनबाडी कार्यकर्ता , मिनी कार्यकर्ता सहायिका, सहयोगिनी कार्यरत है।

योजना का विवरण

बच्चोंै एवं महिलाओं में कुपोषण की स्थिति में सुधार लाने हेतु आंगनबाडी केंन्द्रों पर वर्ष में 300 दिन पंजीकृत लाभान्वितों को पूरक पोषाहार का विवरण किया जाता हैा जिससे बच्चोंड एवं महिलाओं कों वांछित न्यूतन्तोम प्रोटिन एवं उर्जा पूर्ति कर उनके पोषण स्तमर केा सुधार जा सके। 7 माह से 3 वर्ष,गर्भवती, धात्री एवं किशोर बालिकाओं बेवी मिक्स विकेन्द्री यकृत पोषाहार साप्तानहिक वितरण किया जाता है।

उपरोक्त पोषहार समस्त पांचों परियोजनाओं में वितरित किया जा रहा है साथ ही स्वतयं सहायता समूहों को बेबीमिक्सो बनाने के लिये सक्षम किया जा रहा है। जिले में परियोजनावार विकेन्दी्यकृत बेबीमिक्स पोषाहार एवं गर्म पोषाहार वितरण की स्थिति निम्न। प्रकार है।

स्वाकस्य्रो संस्था‍न में जन्मी लेने वाले सभी बच्चोंी को बी.सी.जी. का टीका और पोलियों की अतिरिक्ते खुराक (जीरो डोज) जन्मस के समय दी जाती है।

याद रखे:-

1. बच्चों में बी.सी.जी. का टीका, डी.पी.टी. के टीके की तीन खुराके,पोलियों की तीने खुराके व खसरे का टीका उनकी पहली वर्षगांठ से पहले अवश्यब लगवा लेना चाहिए।

2. यदि भूल वश कोई टीका छुट गया है तो याद आते ही स्वािस्थ्य कार्यकर्ता/ चिकित्साक से स्प्.कार्क कर टीका लगवाये ये सभी टीके उपस्वा स्य्स् केन्द्र / प्राथमिक स्वाीस्य्ा केन्द्रे/ राजकीय चिकित्सा‍लयों पर नि:शुल्कय उपल्ध्उपस है।

3. टीके तभी पूरी तरह से असरदार होते है जब सभी टीकों का पूरा कोर्स सही सही उम्र पर दिया जावे।

4. मामूली खांसी ,सर्दी, दस्ती और बुखार की अवस्था। में भी यह सभी टीके लगवाना सुरक्षित है।

योजना का विवरण

समस्तं ऑगनबाडी केन्द्रोंै पर पोषाहार मीनू के अनुसार एक दिन दलिया व एक दिन खिचडी बच्चोंष को खिलया जाता हैा दलिया व खिचडी की निर्धारित सामग्री निम्न प्रकार है:-

क्र.सं. दलिया सामग्री मात्रा खिचडी सामग्री मात्रा
1दलिया 33 ग्रामचावल58 ग्राम
2दाल 17 ग्रामदाल17 ग्राम
3तेल5 ग्राम तेल5 ग्राम
4चीनी25 ग्रामनमक2 ग्राम
योग80 ग्राम81 ग्राम
योजना का विवरण

समेकित बाल विकास सेवाओं की 6 सेवाओं मे से यह एक प्रमुख सेवा है। जो केन्द्रों पर गर्मियों मे 8 से 12 बजे तक तथा सर्दियों में 10 से 2 बजे तक 3 से 6 वर्ष के बच्चों को प्रदान की जाती है । बच्चों के शारीरिक,सामजिक, भावनात्मक संज्ञानात्मक, भाषाई तथा लिखने़-पढने की तैयारी हेतु यह गतिविधियाा बच्चों के सर्वागीण विकास हेतु महत्वलपूर्ण है। 3 से 6 वर्ष के बच्चों् को प्रतिदिन आंगनबाडी केनद्रों पर शालापूर्व शिक्षा वार्षिक कलैण्डणर के अनुसार विभाग द्धारा भेजे गये किलोल पुस्तोक द्वारा निर्धारित विषयवस्तु् पर दी जाती है। शालापूर्व शिक्षा के लक्ष्योंल की शत प्रतिशत उपलब्धि अर्जित करने हेतु समस्तद बाल विकास परियोजना अधिकारियों को निर्देश दिये गये है।

योजना का विवरण

बच्चों एवं महिलाओं में संक्रामक रोगों से प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिये समेकित बाल विकास सेवा कार्यक्रम के अन्तोर्गत सभी 0-1 वर्ष आयु के बच्चोंि को टी.बी. गलघोटु, काली खांसी , टिटेनस , पोलियों एवं ख्स रा तथा गर्भवती महिलाओं को टिटेनस के टीके आंगनबाडी केन्द्रेां पर चिकित्सा एवं स्वािस्य्स विभाग के माध्यकम से लगवाये जाते है। इस सेवा के लिए विभाग द्वारा वित्तींय प्रावधान एवं भैतिक लक्ष्य‍ नहीं रखे जाते है। टीकाकरण कार्य आंगनबाडी केन्द्रों पर चिकित्साध एवं स्वािस्थेय विभाग के कार्मिकों द्वारा किया जाता है।

योजना का विवरण

जिले में संचालित सभी आंगनबाडी केन्द्रज पर मातृ शिशु स्वा स्थ्य एवं पोषण दिवस प्रतिमाह आयोजित किया जाता है जिसके अन्तकर्गत डयू‍ लिस्टस के अनुसार गर्भवती एवं बच्चोंण का स्वािस्थहय जांच, महिलाओं को स्वा्स्य्के व पोषण शिक्षा,गर्भवती टीकाकरणा व बच्चों को टीकाकरण , आयरन गोली वितरण , वजन, आयोडीन नमक, अन्न् प्रासन, व गोद भराई इत्यारदि कार्यक्रम संपादित किये जाते है प्रत्येसक आंगनबाडी केन्द्र पर मातृ शिशु स्वानस्थ य एवं पोषण दिवस गर्मियों में 8 से 12 सर्दियों में 10 से 5 तक आयोजित होता है । इसमें मेडीकल विभाग से ए.एन.एम.समस्त टीकों सहित उपस्थित होती है । आशा सहयोगिनी संम्बरन्धित लाभान्वितों को केन्द्रम पर बुलाकर लाती है। और आवश्य क टीके एवं स्वागस्य् ह जांच को सुनिश्चित किया जाता है। स्वाकस्थमय जांच के लिये टेबिल , पर्दा, बीपीयन्त्रन एवं वजन तौलने के लिये बचचों एवं गर्भवती वजन की मशीन दी गई है।

योजना का विवरण

मातृ शिशु स्वा स्थ य एवं पोषण दिवस पर गर्भवती महिलाओं धात्री माताओं एवं बच्चों की स्वा स्थतय जांच की जाती है। इस सेवा अन्तवर्गत बच्चोंए का वजन लेकर वृद्धि निगरानी तालिका संधारित की जाती है अति कुपोषित एवं कुपोषित बच्चों की पहचान कर इन्हेंए सलाह चिकित्ससकीय सहायता प्रदान की जाती है बच्चोंी के स्वा स्थ य की जांच तथा प्रसव पूर्व एवं प्रसव उपरान्तत महिलाओं देखभाल स्वािस्थंय कार्यकताओं द्वारा की जाती है। महिलाओं एवं बालिकों आयरन- फोलिक एसिड की गोलियों का वितरण किया जाता है। बीमार बच्चोंा एवं माताओं को आंगनबाडी केन्द्रों पर उपलब्ध मेडीकल किट से तथा स्वाएस्थएय विभाग के माध्यंम से जरूरी दवाओं का वितरण किया जाता है।

योजना का विवरण

प्रति माह सभी आंगनबाडी केन्द्रों पर 0-5 वर्ष के बच्चोंे एवं गर्भवती महिलाओं का वजन लिया जाता है। उनमें जो बच्चेक अति कुपोषित एवं जो महिलाऐं संकटग्रस्त पाई जाती है उन्हेंा M.T.C.,P.H.C.,C.H.C.,S.U.B., Center पर रेफर कर संन्दतर्भ सेवाओं से लाभान्वित किया जाता है।

योजना का विवरण

15 से 45 वर्ष की महिलाओं को प्रत्येतक माह मातृ शिशु स्वारस्य्पा एवं पोषण दिवस पर स्वानस्य् क एवं पोषण शिक्षा दी जाती है इसमें पोष्टिक भोजन बनाने उसकों सुरक्षित रखने व मौसमी बीमारियों से बचाव , स्ववच्छाता एवं खाधान्नस सामग्री के रखरखाव की व्यदवहारिक जानकारी दृश्यो एवं श्रृव्यव सामग्री के माध्य म से दी जाती है। इस सेवा के माध्यकम से महिलाओं विशेष रूप से माताओं को बच्चोंप स्वाीस्य् ख एवं पोषण की जरूरत की पूर्ति हेतू सक्षम एवं समर्थ्‍ बनाने का प्रयास किया जाता है। पोषाहार तथा स्वादस्थ य शिक्षा सेवा घटक को प्रभावी बनाने के लिए आंगनबाडी केन्द्रों पर व्या पक रूप से सूचना, शिक्षा,एवं संचार सामग्री उपल्ध्ने कराई जाती है। इसके माध्यपम से माताओं को सुरक्षित मातृत्व, ,स्न््री पान, बच्चोंी टीकाकरण एवं समय पर उपरी आहार आदि विशेष पर जानकारी दी जाती है साथ ही परिवार कल्याचण कार्यक्रम (नसबन्दीश के केस कराने हेतु) प्रेरित किया जाता है।

योजना का विवरण

बच्चों में कुपोषण को कम करने के लिये 0 से 3 के सभी बच्चों का प्रतिमाह वजन लिय गया तथा 3-5 के स्मरस्ते बच्चों का त्रैमासिक वजन लिया जाता है। इसके अन्तमर्गत बच्चों का वजन लेकर उसकों ग्रोथ चार्ट पर अंकित किया जाता है। और बच्चेे बढने की स्थिति तथा दिशा ज्ञात कर उसके अभिभावकों को तदानुसार परामर्श दिया जाता है ताकि बच्चास यदि कुपोषित हो रहा है तो उसका तुरन्तक निदांन किया जा सके इसके द्वारा नियमित वृद्धि निगरानी से बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सकता है। जो बच्चे् अतिकुपोषित श्रेणी में आते है उनकों एमटीसी धौलपुर स्वाोस्थाय केन्द्रब पर रैफर किया जाता है।

योजना का विवरण

10 से 19 वर्ष की किशोरी बालिकाओं में खून की कमी दूर करने के लिये इस जिले में यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। स्कूलल नहीं जाने वाली किशोरी बालिकाओं को प्रति सप्ताेह 1 गोली आयरत फोलिक एसिड आई एफ ए की दी जाती है। माह फरवरी में 2484 किशोरी बालिकाओं को आई एफ ए की गोली से लाभान्वित किया गया । इस वर्ष 2014 में आयरन फोलिक एसिड की गोलियां पार्याप्तल मात्रा में उपलब्ध नहीं हुई।

योजना का विवरण

वर्ष 2013-14 में निर्धारित लक्ष्य् के अनुसार 4800 केस के विरूद्ध 2152 केस कराये गये थे। वर्ष 2013-14 में माह मई तक 11 केस कराये जा चुके है।

योजना का विवरण

विटामिन ‘ए’ की कमी के कारण बच्चोंर पर पडने वाले दुष्प्र भाव को रोकने के लिये चिकित्सा एवं स्वा्स्थ य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्तर प्रयासों एवं यूनिसेफ के सहयोग से 9 माह से 5 वर्ष के सभी बच्चोंं को प्रति वर्ष में दो बार अर्थात 30 अप्रेल से 30 मई व 30 अक्टूयम्बरर से 30 नवम्बवर के बीच 23 एमएल विटामिन ‘ए’ की खुराक पिलाये जाने के साथ सामान्य् टीकाकरण एवं पोषण सलाह का विशेष कार्यक्रम अप्रेल 2001 से चलाया जा रहा है। 26 वां चरण 30 अक्टुशम्बमर 2013 से 30 नवम्बार 2013 तक चलाया गया है। रिपोर्ट श्रीमान की सेवा में प्रस्तुवत की जा रही है।


महिला अधिकारिता


योजना का विवरण

समाज में विवाहों पर अनावश्य0क व्ययय की प्रवृति बढती जा रही है। सामूहिक विवाहों के आयोजन से इस पर नियंत्रण प्राप्तय करने का प्रयास किया जा रहा है। राज्यस सरकार द्वार इनका महत्वस स्वीणकार करते हुए ऐसे कार्यक्रमों के प्रोत्साैहन हेतु वर्ष 1996 में सामूहिक विवाह अनुदान नियम बनाये गये। इन नियमों को औश्र प्रभावी बनाये जाने हेतु राजस्थाुन सामूहिक विवाह नियमन एवं अनुदान नियम ,2009 दिनांक 20.01.2010 से लागू किये गये है। इन नवीन नियम के मुख्यय बिन्दु निम्नानुसार है:-

1. इन नियमों के अन्त र्गत संस्था‍ को सामूहिक विवाह आयोजन के लिए जिला कलेक्टार / सक्षम अधिकारी की अनुमति प्राप्त करनी आवश्यवक होगी।

2.इन नियमों के अन्तार्गत राशि रूप्येत 6000/- प्रति जोडा अनुदान देय है जिसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रूप्येर रखी गई है।

3. अनुदान प्राप्ति के लिए सामूहिक विवाह आयोजन में जोडों की न्यूशन्तअम संख्याी 10 होनी अपेक्षित है इस तरह एक सामूहिक विवाह में अधिकतम 166 जोडों को अनुदान दिया जा सकता है।

4. प्रति जोडा अनुदानित राशि मे से 25 प्रतिशत राशि (वर्तमान में रूप्येत 1500/-संस्थाद को विवाह के आयोजन के रूप में देय होगी जबकि 75 प्रतिशत राशि (वर्तमान आधार पर रूप्येे 4500/-) नविवाहित (वधु) के नाम से डाकघर या अधिसूचित राष्टीकयकृत बैंक में न्यूेनतम तीन वर्ष की अवधि के लिए सावधि, जमा कराई जावेगी ।

5. इन नियमों में आयोजित किये जाने वाले सामूहिक विवाहों का पंजीकरण राजस्थाईन विवाहों का अनिवार्य रजिस्टी यकरण अधिनियम,2009(2009 का राजस्थाईन अधिनियम 16) के अन्तकर्गत अनिवार्य किया गया है।

योजना का विवरण

भारत सरकार द्वारा संपोषित योजनान्तजर्गत स्कूओल न जाने वाली/ स्कू‍ल बीच में छोड. देने वाली 11 से 18 बालिकाओं को लाभान्वित किया जाता है। वर्ष 2012-13 हेतु भारत सरकार ने 209.00 लाख रूपये का प्रावधान स्वीवकृत किया गया है। किशोरी शक्ति योजना के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये बालिका मंडल का गठन किया जाता है। एवं इन मंडलों की बैठकों के दौरान बालिकाओं को स्वलच्छ ता,गृह प्रबंध, पोषण, बालअधिकार, महिलाओं के अधिकार एवं विभिन्नं विभागों की योजनाएं व कार्यक्रमों के प्रति समडा विकसित की जाती है तथा भ्रूण हत्या , दहेज, बाल-विवाह,लिंग-भेद आदि के विरूद्ध निर्णय लेने की क्षमता विकसित की जाती है। इसके अतिरिक्तन जो बालिकाएं स्कूोल नहीं जाती है। उन् बालिकाओं को शिक्षा के विभिन्‍न विकल्पेांो से जोडा जाकर सश्क्ति करण की मुख्ययधारा में लाया जाता है। आंगनबाडी केन्द्रों पर इन बालिकाओं का एमसीएचएन दिवस पर बालिकाओं का स्वाास्य्ा परीक्षण भी किया जाता है । पेाषण एवं स्वािस्य्ण शिक्षा, आयरन फौलिक एसिड गोली का वितरण भी सुनिश्चिथत किया जाता है। इन बालिकाओं को व्याकवसायिक प्रशि‍क्षण प्रदान किया जाता है।

योजना का विवरण

मान. मुख्यनमंत्री महो. द्वारा वर्ष 2010-11 के अनुपालन में गैर-शासकीय संस्थाेनों के माध्य्म से पुलिस जिलों में महिला सुरक्षा एवं सलाह केन्द्र स्थाापित किए जाने के संदर्भ में महिला एवं सलाह केन्द्र नियमन एवं अनुदान योजना,2010 लागू की गई है। राज्या के 39 पुलिस जिलों में महिला थाना /चयनित थाना के सा महिला सुरक्षा एवं सलाह केन्द्र संचालन चयनित गैर- शासकीय संस्थओं को अधिकृत कर दिया गया है। इन चयनित संस्थााओं को प्रथम वर्ष 3.00 लाख रू. अनुदान दिया जाता है इसके पश्चा त प्रति वर्ष 2.70 लाख रू. अनुदान देय है।

योजना का विवरण

राज्य में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्ति बनाने की दृष्टि से स्ववयं सहायता समूह कार्यक्रम वर्ष 1997-98 से संचालित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम राज्यय के सभी 33 जिलों में संचालित है। इस कार्यक्रम के अर्न्तथगत 10 से 20 महिलाए स्वंयं अपने निर्णय लेकर सूमह बनाती है तथा अपनी छोटी-छोटी बचतो के माध्याम से , सहयोग ,स्वाववलम्ब न की प्रवितयां विकसित करती है एवं स्वटरोजगार की और प्रवृत होती है।

योजना का विवरण

योजना का उदेदश्यम निर्धन्‍, विधवा, परित्याैक्ताधओं, ग्रामीण एवं गरीब महिलाओं के जीवन स्तनर में सुधार करना है। महिलाओं को पांरपरिक तथा गैर पांरपरिक व्ययव्साायों में सार्वजनिक उपक्रमों /नियमेां /गैर सरकारी संगठनों / एस.एच.जी. के माध्यनम से प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार उपलब्धर कराये जाते हैा येाजना अन्तोर्गत समस्तप जिलों से विभागीय नार्म्सम अनुसार अनुभवी महिला विकास कार्यो से संल्न्जना ,वित्तीजय सुदृढ प्रशक्ष्कों से सज्जित , आधारभूत सुविधाओं व मशीनरी युक्त अनुभवी स्व‍यं सेवी संगठनों के प्रस्तािव आंमंत्रित किये जाकर मुख्या कार्यकारी अधिकरी , जिला परिष्द की अध्यक्षता में गठित कमेठी द्वार विस्तृसत परीक्षण पश्चाात श्रेष्ठी संस्थासओं के प्रस्तामवों राज्य् पर अग्रेषित किये जाते है।

योजना का विवरण

राज्य सरकार की बजट घोषणा वर्ष 2009-2010 की अनुपालना में प्रारम्भत की गई प्रियदर्शनी आदर्श स्वीयं सहायता समूह योजना की क्रियान्विति निरंतर रूप से की जा रहीं है । योजना अन्तआर्गत प्रत्येहक जिले पर चिन्हित 10 स्वंकय सहायता समूहों को प्रियदर्शनी आदर्श स्वोयं सहायता समूह के रूप में विकसित किया जाता है। ये आदर्श समूह एस.एच.जी. कार्यक्रम संचालन के निर्धारित सभी प्रक्रिया एवं मानदण्डोंज को पूरा करते हुए क्षेत्र में संचालित अन्यच समूहों के लिए एक आदर्श प्रतीक एवं प्ररेणा का कार्य करगे एवं इन्हें देख कर अन्य समूह भी अपनी गतिविधियों को व्यतवस्थित कर सकेगें।

यह योजना स्व1यं सेवी संगठनों के माध्योम से क्रियान्विनत की जायेगी । योजना के अन्तदर्गत प्रत्येाक जिले में चिहिन्तठ 10 एस.एच.ओं. को चयनित एन.जी.ओं. के माध्यतम से कुछ सूचकों को प्राप्त् करने की स्थिति में ही उस समूह प्रियदर्शिनी आदर्श्‍ स्वजयं सहायता सूमह घोषित किया जाएगा । इन सूचकों में समूह की नियमित मासिक रूप से बचत, नियमित रूप से आंतरिक लेन-देन, अपने ऋण का निर्धारित अवधि में 100 प्रतिशत पुनर्भुगतान करने के साथ-साथ समूह के स्था यी रूप से आयजनक गतिविधियों में संलग्नउ होकर उनके 60 प्रतिशत सदस्यों की कम से कम 1100/- प्रतिमाह आय होनी चाहिये ।

योजना का विवरण

प्रत्येवक जिले में 10 स्वंजय सहायता समूहों को उचित मूल्य् की दुकानों का आंवटन किया जाना है। चंकि महिला एस.एच.सी स्थािनीय क्षेत्र के निवासी होते है तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के स्ममस्त लाभार्थियों के बारे में व्य क्तिश्‍: जानकारी रखते है, अत: यदि वे एस.एस.जी. उचित मूल्या की दुकान का संचालन करते है तो सुचारू रूप से सही लाभार्थी को सामग्री का वितरण कर सकते हैा इससे WSHGs को स्थांनीय स्तहर पर स्वारोजगार मिल सकेगा । विभाग द्वारा महिला स्व यं सहायता समहों को दुकान आंवटन होने पर प्रति एस.एस.जी. रू.7500 की कापर्स राशि स्वीेकृत की जाती है, जिससे कि समूहों प्रतिमाह राशन सामग्री का क्रय कर सकते है।

योजना का विवरण

राज्यर सरकार की बजट घोषणा वर्ष 2011-12 के अन्त्र्ग्तक सभी वर्गों की महिलाओं को नि:शुल्का बेसिक कम्यू िल टर प्रशिक्षण राजस्थािन नॅालेज कार्पोरेशन लिमिटेड के माध्याम से दिये जा रहे है। इस प्रशिक्षण हेतु निर्धारित फीस की राशि राज्यण सरकार द्वारा वहन की जा रही है। महिलाओं एवं बालिकाओं को दो प्रकार के कम्यूाशि टर प्रशिक्षण योजनान्तरर्गत दिये जा रहे है। प्रथम ‘राजस्थाोन स्टेरट सर्टिफिकेट कोर्स इन इन्फोूरमेशन टेक्नातलोजी (RS-CIT) एवं द्धितीय ‘डिजिटल सहेली’। प्रथतम प्रशिक्षण 3 माह की अविधि के लिए है। जिसमे 16-45 आयु वर्ग की 10वीं पास महिला पात्र है। द्धितीय प्रशिक्षण 1 माह की अवधि का है। जिसमें 11-50आयु वर्ग की 5वीं पास महिला पात्र हैा वर्ष 2012-13 में जनवरी 2013 तक आई.टी.ज्ञान केन्द्रों के माध्यमम से RS-CIT पाठयक्रम अन्तकर्गत 15047 महिलायें/ बालिकायें प्रशिक्षण प्राप्तग कर रही है, तथा डिजिटल सहेली पाठयक्रम अन्तषर्गत – 36321 महिलाऐं/ बालिकायें प्रशिक्षण प्राप्ती कर चुकी है । निदेशालय महिला अधिकारिता विभाग अन्त4र्गत भी एक ‘अमृता आई.टी.ज्ञान केन््द्रक संचालित किया जा रहा है।

योजना का विवरण

कुशल मंगल कार्यक्रम हाईरिस्कय प्रेगनेन्सी् के चिनिहकरण,लाइनलिस्टिंग,उपचार एवं फलोअप की एक समेकित योजना है।

कार्यनीति:-

कुशल मंगल कार्यक्रम छ: सूत्रीय दृष्टिकोण का अनुसरण करता है जिसमें गर्भवती महिला में अधिक जोखिम की शीघ्र पहचान ,लाइन लिस्टिंग, प्रबधन एवं फोलोअप को केन्द्रित किया है।छ: सूत्रीय दृष्टिकोण निम्नअलिखित है:-

1. नियेाजित गर्भधारण- गर्भधारण 20 वर्ष से पूर्व एवं 35 वर्ष के बाद ना हो इसे टाला जाये।

2. टेकिंग एवं प्रबंधन- नियमित जांच के माध्य म से अधिक जोखिम वाली गर्भवती माताओं की पहचान

3. फोलोअप (HRP State Help Desk & Conuseling Centre (104) के द्वारा- राज्यH स्तlर से फोन द्वारा महिलओं को सेवाओं की जानकारी एवं प्राप्तम सुविधाओं की जानकारी दे‍ते हुए सहयोग करना।

4. निश्चित रेफरल परिवहन- उपल्ध्ार 104/108 आदि वाहनों के नम्ब।र देते हुए सेवाओं से जोडना।

5. योजनाबद्ध संस्थाुगत प्रसव- आवश्येकतानुसार उपयुक्त0 चिकित्साय संस्थाएन पर भेजना।

6. माता एवं शिशु की प्रसवोत्तेर देखभाल’- 42 दिन तक विशेष देखभाल।

योजना का विवरण

‘’कुशल मंगल कार्यक्रम’’ का एक प्रमुख घटक ‘’प्रसूति नियोजन दिवस’’ भी है।

यह दिवस राज्य के समस्तौ उपस्वा स्थ्यख केन्द्र एवं सामुदायिक स्वाभस्य् ह केन्द्रप मुख्या लयों पर आयोजित किया जावेगा।

इसका आयोजन माह 1 अक्टू म्बार 2015 में प्रारम्भय किया जायेगा।

दिवस:- प्रतिमाह चौथा गुरूवार

स्था‍न:-

उपस्वाथस्य केन्द्र, प्राथमिक स्वाथस्य केन्द्र् एवं सामुदायिक स्वाथस्य केन्द्र् मुख्याकलय पर ।

आवश्यमक व्यय:-

प्रत्येक आयोजन पर राशि 300/-रूप्येे तक की राशि S/C United Fund/VHSC Fund से प्रति माह आवश्यरक व्यकव्थाराश हेतु व्य्य की जावे। प्रसूताओं को दी जाने वाली रेफरल पर्ची जिलास्तआर से जेएसवाई प्रशासनिक मद से (प्रति उपकेन्द्रे 3000 की आबादी पर संभावित 25-30 प्रति माह की गणना में मार्च 2016 तक के लिए) छपवाकर उपकेन्द्र स्त र तक दी जावे।

समय:-

1 अप्रैल से 30 सितम्बतर (प्रात:8-2 बजे) एवं 1 अक्टूाम्ब्र से 31 मार्च (प्रात:10 से 4बजे)

लाभार्थी:-

8-9 वे माह की गर्भवती माताऐं (3000 की आबादी पर संभावित 25-30) अधिक जोखिम वाली चिन्हित गर्भवती माताऐं (किसी भी माह की संभावित 5-6)

सेवाये:-

सभी आवश्य क जांच यथा- वजन, बीपी, हिमोगलोबीन, पेट की जांच, बच्चे की स्थिति, फिटल हाई साउड, मूत्र की जांच आदि दी जावे।

एएनएम की भूमिका:-

एएनएम की भूमिका की प्रसूति नियोजन दिवस के सफल आयोजन की सम्पूीर्ण जिम्मेिदारी रहेगी।

आशा की भूमिका :-

प्रयेूर्क क्षेत्र की आशा की यह जिम्मेीदारी होगी कि वह अपने गांव की 8-9 वें माह की गर्भवती माताओं को उपकेन्द्रह / स्वाहस्य् ज केन्द्रम पर लेकर आवे।

सलाह विचार विमर्श स्वामस्थ य कार्यकतों एवं आशा द्वारा:-

1. गर्भावस्था की वर्तमान स्थिति के बारे में प्रत्येशक महिला को सरल भाषा में जानकारी देना।

2. प्रसव की अनुमानित तिथि की संभावना के अनुसार चिकित्साम संस्थाेन का चयन किया जाना।

3. स्थाथनीय चिकित्साथ अधिकारी द्वारा वार्ता कर चयनित चिकित्सा् संस्थाेन की जानकारी महिला एवं परिजनों को बताना एवं ममता कार्ड पर उल्लेनखित करना।

4. प्रयेेन क गर्भवती महिला को चिन्हित चिकित्साा संस्थाान व परिवहन आदि की जानकारी (प्रसूति नियोजन दिवस रेफरल पर्ची) मे देनी आवश्यीक होगी।

5. अगर महिला को अधिक जोखिम वाली गर्भवती माता के रूप में चिन्हित किया गया है, तो उपयुक्तत उच्चू चिकित्सान संस्थाान पर प्रसव हेतु सलाह देना एवं आशा की नामजद जिम्मे‍दारी तय करना।

6. अधिक जोखिम वाली चिन्हित गर्भवती माता की जांच शुक्रवार को नजदीकी सामुदायिक स्वालस्य््भ केन्द्र पर ‘’ सुरक्षित मातृत्व दिवस’’ कैम्पी में जरूरी जांचे आवश्य्क रूप से करना।

7. प्रसूति नियोजन दिवस के दिन चिन्हि्त गंभीर एनिमीया (हिमोग्लोूबीन 7ग्राम से कम) को चिन्हिकरण पश्चाथत(IV Iron) हेतु भिजवाया जाना ।

8. नजदीकी 104 एवं 108 के वाहन चालक का नाम एवं मोबाइल नं. देना।

9. राज्य स्‍‍तरीय 104 हैल्प्ल‍ लाइन्‍ से वार्ता कर नजदीकी जननी एक्स।प्रेस वाहन की उपलब्धनता के बारे में जानकारी लेना।

10. बैंक पास बुक अथवा पास बुक की छाया प्रति।

11. पहचान हेतु राशन कार्ड/भामाशाह/आाधारकार्ड/पहचान पत्र(कोई भी एक) ताकि प्रोत्सा हन राशि लाभार्थी को सीधे उसके बैंक खाते में जमा कराई जा सके।

रिपोर्टिंग:-

1. लाभार्थी का विवरण संल्न्‍ क तालिका संख्या ‘’अ’’ में किया जावेगा।

2. दिवस आयोजन के उपरान्त् सारांश संलग्न् तालिका संख्यात ‘’ब’’ में दूसरे दिन प्रत्येाक एएनएम द्वारा संबधित पीएचसी द्वारा ब्लॉ क को ब्लॉ्क सीएमएचओं को आवश्यीक रूप से भिजवाई जायेगी।

3. जिलास्तरर पर सभी खण्डों की सूचना इकजाई कर दिवस आयोजन के तीन दिन पर राज्यर स्तयर पर (pdmhrch@gmial.com)भिजवाई जायेगी।

योजना का विवरण

‘‘सुरक्षित मातृत्व दिवस’’ की उपयोगिता को ध्याशन में रखते हुए इसे ‘’कुशल मंगल कार्यक्रम’’ के एक मुख्यर घटक के रूप मे अपनाया गया है।

इसका आयोजन माह 1 अक्टू म्ब र,2015 से किया जायेगा।

इस विस्तृनत दिशा निर्देश क्रमांक 197 दिनाक14.09.2015 को जारी किये जा चुके है।

स्था न:- प्रत्येकक चिन्हित सामुदायिक स्वा स्थयय केन्द्र पर।

यह दिवस एक निश्चित शुक्रवार प्रथम,द्धितीय,तृतीय अथवा चतुर्थ को मनाया जायेगा।

यह पेनल जिला स्तिर पर आगामी सात दिवस में तैयार कर राज्यि स्त र पर कैम्पद प्लायन दिया जायेगा।

राज्यन में कुल 398 सीएचसी होगी।

328 सीएचसी पर निजी गायनकोलाजिस्ट व 70 सीएचसी पर राजकीय गायनीकोलोजिस्टन प्रत्येिक माह लगाये जायेगे।

सुरक्षित मातृत्वट दिवस की जिलेवार प्रतिमाह निर्धारित संख्याी सूची अनुसार परपित्र में उल्लेषखित है।

328 प्राइवेट स्त्रीीरोग विशेषज्ञ की सेवाये प्राप्त की जावे उन्हें प्रति कैम्प् 500/- की राशि मानदेय एवं आने-जाने की व्यीवस्थाी सहित देय है।

328 सीएचसी कैम्पज व्योव्थााी हेतु राशि 2500/- रूप्येक कैम्पक की दर से स्वीञकृति‍ जारी की जा चुकी है।

जहां राजकीय सेवारत विशेष्ज्ञों द्वारा कैम्पी आयोजन किया जा रहा है वहां कैम्पे आयोजन की राशि सीएचसी के आरएमआरएस/ अनटाईड फण्डय से राशि 2500 /- रूप्येा की दर से उपयोग में ली जावे।